देहरादून । उत्तराखंड की राजनीति में शनिवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत देहरादून स्थित प्रवर्तन निदेशालय के क्षेत्रीय कार्यालय में पेश हुए। करीब छह घंटे तक चली मैराथन पूछताछ के बाद शाम लगभग साढ़े पांच बजे वे बाहर निकले। दफ्तर के बाहर पहले से ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे। ईडी की इस कार्रवाई को हरीश रावत ने राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित करार दिया।
सत्ता के अहंकार का नतीजा है यह कार्रवाई : रावत
ईडी दफ्तर से बाहर आते ही पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें ईडी ने नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार और आगामी चुनावों को लेकर सत्तापक्ष के मन में बैठे डर ने बुलाया था। उन्होंने कहा, “अंदर अधिकारियों का व्यवहार बहुत सौहार्दपूर्ण रहा और जो भी हकीकत थी, वह मैंने स्पष्ट कर दी। लेकिन देश में जिस तरह बदले की भावना से काम हो रहा है, वह बेहद चिंताजनक है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि खराब स्वास्थ्य के कारण वे दिल्ली में थे, लेकिन इस बहाने उन्हें अपने प्रदेश उत्तराखंड वापस लौटने का मौका मिल गया।
लंबी पूछताछ से निपटने के तुरंत बाद हरीश रावत राजनीतिक बयानबाजी छोड़ सीधे शहीदों के नमन में जुट गए। वे गांधी पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शहीद केसरी चंद की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने कारगिल युद्ध के अमर जवानों को याद किया।
रावत ने चीड़ बाग स्थित प्रांतीय शहीद स्मारक, नींबूवाला में शहीद दल बहादुर थापा और दुर्गा मल्ल पार्क में शहीद दुर्गा मल्ल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान गोरखा समाज के प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। रावत ने कहा कि गोरखा समाज और सेना का राष्ट्र रक्षा में अतुलनीय योगदान रहा है।
श्रद्धांजलि यात्रा के अंतिम पड़ाव में पूर्व सीएम ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) स्वर्गीय जनरल बिपिन रावत की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावर करने वाले रणबांकुरों का बलिदान किसी भी राजनीतिक परिस्थिति से कहीं अधिक ऊंचा है। शहीदों की स्मृति हमें याद दिलाती है कि देश, संविधान और लोकतंत्र के प्रति हमारा कर्तव्य हर परिस्थिति में सर्वोपरि होना चाहिए।
उत्तराखंड में आगामी निकाय व अन्य भावी चुनावों की सरगर्मियों के बीच केंद्रीय जांच एजेंसियों की इस हलचल ने राज्य का पारा बढ़ा दिया है। कांग्रेसजनों ने इस पूरी कवायद को विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास बताया है।
