कलेक्ट्रेट में ताला मिला तो छत पर चढ़े राज्य आंदोलनकारी, जमकर की नारेबाजी

मूल निवास-1950 और सशक्त भू-कानून समेत कई मांगों को लेकर किया  प्रदर्शन।।
 पुलिस व अधिकारियों के पुतले फूंके, एडीएम के माध्यम से सीएम को भेजा ज्ञापन
उत्तरकाशी। राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को उत्तरकाशी में माहौल गरमा गया। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र पोखरियाल के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने भैरव चौक से मुख्य बाजार होते हुए राज्य निर्माण आंदोलनकारी चौक तक रैली निकाली। इस दौरान तत्कालीन पुलिस कार्रवाई के विरोध में पुलिस का पुतला फूंका गया। मूल निवास के मुद्दे पर विरोधी रुख रखने वाले अधिकारियों के प्रतीकात्मक पुतले का भी दहन किया गया।
रैली के बाद आंदोलनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे तो जिलाधिकारी कार्यालय पर ताला बंद मिला। इससे आंदोलनकारियों में आक्रोश बढ़ गया। कुछ आंदोलनकारी कार्यालय की छत पर चढ़ गए और ‘मूल निवास-1950 अनिवार्य करो’ और ‘राज्य आंदोलनकारियों को न्याय दो’ जैसे नारे लगाए। मौके पर काफी देर तक नारेबाजी और प्रदर्शन चलता रहा।
पेंशन मामलों को लंबित रखने का आरोप
केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र पोखरियाल ने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों की पेंशन से जुड़े मामले सचिवालय में बार-बार लंबित किए जा रहे हैं। इससे आंदोलनकारियों को अपने हक के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जिला अध्यक्ष विजय बहादुर सिंह रावत ने सरकारी नौकरियों में मूल निवास-1950 को अनिवार्य करने और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर सशक्त भू-कानून लागू करने की मांग की। साथ ही राज्य आंदोलनकारियों को राज्य सेनानी का दर्जा देने की मांग उठाई।
पंचायतों में 30 प्रतिशत आरक्षण की मांग
वरिष्ठ उपाध्यक्ष खुशहाल सिंह बिष्ट ने त्रिस्तरीय पंचायतों में राज्य आंदोलनकारियों के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की मांग रखी। उन्होंने आंदोलनकारियों की पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि की भी मांग की।
समिति पदाधिकारियों के अनुसार, शासन-प्रशासन को मांगों पर कार्रवाई के लिए पहले दस दिन और फिर छह दिन का समय दिया गया था, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में आंदोलन शुरू किया गया। समिति ने कहा कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
एडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
आंदोलन के बाद अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा गया। एडीएम ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि जिला स्तर पर समाधान योग्य मांगों पर कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा और शासन स्तर से संबंधित मांगों को सरकार तक भेजा जाएगा।
प्रदर्शन में समिति के पदाधिकारियों समेत बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।

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