जींद: गुरुग्राम स्थित ‘मेदांता – द मेडिसिटी’ (जिसे 2026 में न्यूज़वीक द्वारा भारत का सर्वश्रेष्ठ अस्पताल माना गया) ने एक मेडिकल नॉलेज-शेयरिंग कार्यक्रम के दौरान डायबिटिक किडनी रोग की समय पर पहचान और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी में हुई तकनीकी प्रगति पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि कैसे शुरुआती पहचान और उन्नत प्रक्रियाएं मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार ला सकती हैं।
लंबे समय तक रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) उच्च रहने से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है, जिसे ‘डायबिटिक किडनी डिजीज’ कहा जाता है। यह बीमारी किडनी की रक्त शोधन नलिकाओं को प्रभावित करती है, जिससे शरीर से अपशिष्ट बाहर निकालने और तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
मेदांता गुरुग्राम के नेफ्रोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट मेडिसिन विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. श्याम बिहारी बंसल ने कहा, “डायबिटिक किडनी रोग को रोकने या उसकी गति धीमी करने के लिए ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन जरूरी है।
उपचार में उचित दवाएं, आहार में बदलाव, स्वस्थ वजन बनाए रखना और धूम्रपान से बचना शामिल है। यूरिनरी एल्बुमिन, एल्बुमिन-टू-क्रीटिनिन रेश्यो और ईजीएफआर जैसे परीक्षणों के माध्यम से नियमित निगरानी से किडनी की कार्यप्रणाली का सही आकलन किया जा सकता है।” उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर इलाज न मिलने पर रोग ‘एंड-स्टेज रीनल डिजीज’ में बदल सकता है, जहां डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
दूसरी ओर, आधुनिक एंडोस्कोपी तकनीकों पर बात करते हुए मेदांता गुरुग्राम के इंटरवेंशनल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के वाइस चेयरमैन डॉ. राजेश पुरी ने बताया कि तकनीक के विकास के साथ एंडोस्कोपी केवल रोग की पहचान तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह एक ही प्रक्रिया के दौरान बायोप्सी के लिए ऊतक (टिश्यू) के नमूने लेने और मिनिमली इनवेसिव उपचार करने में भी सक्षम है। यह प्रक्रिया निगलने में कठिनाई, लगातार पेट दर्द, उल्टी या मल में रक्त आने जैसे लक्षणों की जांच के साथ-साथ ब्लीडिंग अल्सर के इलाज, ग्रोथ्स को हटाने या स्टेंट लगाने में भी मदद करती है।
आईएमए जींद द्वारा 12 सितंबर 2026 को उत्सव होटल, देवीलाल नगर, जींद में आयोजित इस कार्यक्रम में:
* डॉ. पुरी की टीम से मेदांता गुरुग्राम के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. शुभम मेहता ने “रीसेंट एडवांसेज इन एंडोस्कोपी” पर व्याख्यान दिया।
* डॉ. बंसल की टीम से नेफ्रोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट मेडिसिन की एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. शिवानी कंवल ने “मैनेजमेंट ऑफ डायबिटिक किडनी डिजीज” विषय पर जानकारी साझा की।
इस पहल के माध्यम से मेदांता का उद्देश्य विशिष्ट चिकित्सा विशेषज्ञता को स्थानीय समुदायों तक पहुंचाना और शुरुआती निदान व आधुनिक उपचारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
