NEET UG 2025: फर्जी दस्तावेज से MBBS एडमिशन कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 2 गिरफ्तार

देहरादून में NEET फर्जीवाड़े पर पुलिस का एक्शन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से मिला था दाखिला

उत्तराखंड में फर्जी प्रमाण पत्र पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला, पुलिस ने दो आरोपियों को भेजा जेल

45-45 लाख रुपये में बेचीं MBBS की सीटें, मेरठ की कंसल्टेंसी चलाने वाला सरगना दबोचा गया

देहरादून । उत्तराखंड में नीट यूजी 2025 की काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच फर्जी दस्तावेजों के जरिए एमबीबीएस की सीटें हथियाने वाले एक बड़े रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। देहरादून की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने कार्रवाई करते हुए इस फर्जीवाड़े में शामिल दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में से एक मेरठ में एजुकेशन कंसल्टेंसी चला रहा था, जबकि दूसरा आरोपी अपने बच्चों और परिचितों का दाखिला कराने के लिए दलाल के संपर्क में आया था।
मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब राज्य सरकार के ‘अपनी सरकार पोर्टल’ पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के लिए कुछ आवेदन प्राप्त हुए।

रायपुर और क्लेमेंटाउन थाना क्षेत्रों में जमा किए गए इन आवेदनों के साथ संलग्न दस्तावेजों का जब प्रशासनिक सत्यापन कराया गया, तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसके बाद रायपुर थाने में मु०अ०सं० 380/26 (भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(2), 340(2)) और क्लेमेंटाउन थाने में मु०अ०सं० 86/26 के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र सिंह डोभाल ने एसपी देहात-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने जब अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन में दिए गए पतों की भौतिक जांच की, तो वे सभी फर्जी निकले। इसके बाद पुलिस टीम संबंधित मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में पहुंची, जहां से अभ्यर्थियों की असली फाइलों को कब्जे में लेकर उनके वास्तविक घरों के पते खोज निकाले गए।

विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दो लोगों—रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। रूपेश पंडित (30 वर्ष) मूल रूप से पूर्णिया (बिहार) का निवासी है और हाल में मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में रहकर ‘मिकोडो पाठशाला’ नाम से कंसल्टेंसी चला रहा था। वहीं दूसरा आरोपी अरविंद कुमार, लक्सर (जनपद हरिद्वार) के ग्राम बहादुरपुर खादर का रहने वाला है।

पूछताछ में सामने आया कि रूपेश पंडित पिछले 5 सालों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था और देश-विदेश की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में कमीशन लेकर दाखिले कराता था।

आरोपी अरविंद कुमार अपनी बेटी परी और दो परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस एडमिशन के लिए रूपेश के संपर्क में आया था। रूपेश ने प्रति अभ्यर्थी 45 लाख रुपये में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से सीट दिलाने का सौदा तय किया था। तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस भी ले लिए गए थे, जबकि बाकी रकम पढ़ाई शुरू होने के बाद दी जानी थी।

एसआईटी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इस रैकेट के तार अन्य राज्यों या शासकीय दफ्तरों के कर्मचारियों से भी जुड़े हुए हैं। पुलिस का कहना है कि फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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